8. कर्ण पर्व ~ महाभारत | Karna Parv ~ Mahabharat Stories In Hindi
कर्ण पर्व के अन्तर्गत कोई उपपर्व नहीं है और अध्यायों की संख्या 96 है। इस पर्व में द्रोणाचार्य की मृत्यु के पश्चात कौरव सेनापति के पद पर कर्ण का अभिषेक, कर्ण के सेनापतित्व में कौरव सेना द्वारा भीषण युद्ध, पाण्डवों के पराक्रम, शल्य द्वारा कर्ण का सारथि बनना, अर्जुन द्वारा कौरव सेना का भीषण संहार, कर्ण और अर्जुन का युद्ध, कर्ण के रथ के पहिये का पृथ्वी में धँसना, अर्जुन द्वारा कर्णवध, कौरवों का शोक, शल्य द्वारा दुर्योधन को सान्त्वना देना आदि वर्णित है। कर्ण का सेनापतित्व द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद कर्ण को कौरवों का सेनापति बनाया गया। कर्ण ने प्रतिज्ञा की कि मैं पूरी शक्ति से पांडवों का संहार करूँगा। सोलहवें दिन का युद्ध कर्ण ने अपनी सेना का व्यूह रचा। इसी समय नकुल कर्ण के सामने आए। कर्ण ने नकुल को घायल कर दिया। किंतु कुंती को दी हुई अपनी प्रतिज्ञा को याद करके नकुल का वध नहीं किया। दूसरी ओर अर्जुन संसप्तकों से लड़ रहे थे। कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम्हें कर्ण से युद्ध करना है। तभी सूर्यास्त हो गया तथा युद्ध बंद हो गया। रात्रि में कर्ण ने दुर्योधन से कहा कि अर्जुन के पा...